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बीकानेर के वरिष्ठ पत्रकार अशोक राजपुरोहित का निधन, पत्रकारिता जगत में शोक

बीकानेर, 27 सितंबर 2026। वरिष्ठ पत्रकार अशोक राजपुरोहित का रविवार को निधन हो गया। वे दैनिक भास्कर में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत थे। उनके निधन पर बीकानेर के पत्रकार साथियों ने शोक व्यक्त किया है।

अशोक राजपुरोहित लंबे समय से पत्रकारिता से जुड़े थे। उनका जाना उनके परिवार और सहयोगियों के लिए दुखद है। RAJPUROHIT NEWS EXPRESS उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता है और शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करता है।

अपनी जान जोखिम में डाल बचाई थी पैतीस मजदूरों की जिन्दगी , कोरोना को मात नहीं दे सके राजपुरोहित

वर्ष 2001 में अपनी जान जोखिम में डालकर निर्माणाधीन मैरिज पैलेस के मलबे से पैतीस मजदूरों की जिन्दगी बचाने वाले कमलसिंह राजपुरोहित कोरोना को मात नहीं दे पाए । उनका पिछले काफी दिनों से गुजरात के अस्पताल में उपचार चल रहा था । उनके असामयिक निधन से हर कोई स्तब्ध है । केन्द्रीय विद्यालय उत्तरलाई में शिक्षक के बतौर कार्यरत कमलसिंह राजपुरोहित साहसिक कार्यों के लिए सदैव तत्पर रहते थे । शैक्षणिक एवं खेलकूद गतिविधियों के साथ सामाजिक कार्यों में उनकी सक्रिय भागीदारी रहती थी । कुछ दिन पहले कोविड -19 से संक्रमित होने पर उनका बाड़मेर एवं गुजरात के में उपचार चला । लेकिन राजपुरोहित कोरोना को मात नहीं दे पाए । राजपुरोहित हर किसी की मदद के लिए तत्पर रहते थे उल्लेखनीय कार्य के लिए उनको जोधपुर जिला प्रशासन के अलावा रेंड एंड व्हाइट वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया वर्ष 2001 में कमलसिंह राजपुरोहित जोधपुर में सरदारपुरा स्थित राजपुरोहित छात्रावास में रहते थे । वह जयनारायण व्यास विश्व विद्यालय के ओल्ड कैम्पस में बीकॉम प्रथम वर्ष में अध्ययनरत थे सरदारपुरा इलाका पॉश इलाके रूप में पहचाना जाता है । राजपुरोहित छात्रावास के सामने स्थित बड़े भूखंड पर मैरिज पैलेस का निर्माण चल रहा था । यह काफी बड़ा चार मंजिला निर्माण कार्य था । ग्राउंड फ्लोर की छत डाली जा चुकी थी । फर्स्ट फ्लोर पर बल्लियां और लोहे के स्ट्रकचर खड़े करके छत भरी जा रही थी । उस समय करीब 125 श्रमिक काम कर रहे थे । तभी एकाएक फर्स्ट फ्लोर की छत ढह गई और छत के दबाव के कारण ग्राउंड फ्लोर की छत भी कुछ समय में टूट गई ।
इससे करीब 20-30 फीट गहरे गडढे सारे मजदूर फंस गए । छात्रावास में कमल राजपुरोहित ने छत गिरने का धमाका सुना तो भागकर बाहर देखा । घटनास्थल की परिस्थिति देखते हए त्वरित निर्णय लेते हुए वे बल्लियों को बांधने की मोटी रस्सी लेकर पास में स्थित नीम के पेड़ से होते हुए निर्माणाधीन बिल्डिंग के छज्जे पर पहुंचे । वहां से मजबूत आधार के जरिए रस्सा बांधकर नीचे लटकाया और तुरंत उसके सहारे नीचे पहुंचे । दुर्घटनास्थल पर पहुंचने में राजपुरोहित सिर्फ 7-8 मिनट लगे । जबकि तब तक आसपास के लोगों एवं काम करने वाले ठेकेदार को भी पता नहीं चल पाया कि यह क्या हो गया है । कमल ने तुरंत ही मलबे में फंसे लोगों को खींचकर बाहर निकालना शुरू किया । बाहर से मदद मिलने से पहले तक वह लगभग पैतीस मजदूरों को ऊपर का मलबा हटाकर सुरक्षित निकाल चुका था । कमल राजपुरोहित की सूझबूझ एवं हिम्मत के साथ अपनी जान जोखिम में डालकर मजदूरों को बचाने के कारण इस हादसे में कोई जन हानि नहीं हुई । कुछ गंभीर घायलों को महात्मा गांधी अस्पताल ले जाया गया । अन्य मजदूरों को प्राथमिक उपचार दिया गया । उनके इस बहादुरी के कार्य के लिए जोधपुर जिला प्रशासन ने गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान सम्मानित राजपुरोहित किया । इसके अलावा राजपुरोहित को रेड एंड व्हाइट वीरता पुरस्कार से भी सम्मानित किया । इनके सहपाठी रह चुके गौरवराजसिंह जुड़िया के मुताबिक कमल शुरूआत से सेवाभावी था । रक्तदान के साथ हरेक जरूरतमद की मदद के लिए तत्पर रहता था । उनके मुताबिक एक बार छात्रावास के आगे से एक बुजुर्ग रोते हुए देखकर कमल ने उसकी वजह पूछी तो उन्होंने बताया कि उनकी पुत्र वधु उम्मेद अस्पताल में भर्ती है । उसकी जान बचाने के लिए रक्त की जरूरत है , लेकिन मिल नहीं पा रहा है । इस पर कमल तत्काल मोटरसाइकिल लेकर अस्पताल पहुंचा और रक्तदान कर महिला की जान बचाई । गौरवराजसिंह जुड़िया के मुताबिक अपनी जान जोखिम में डालकर मजदूरों की जान बचाने के साहसिक कारनामे के बाद दूसरे दिन के अधिकतर समाचार पत्रों की सुर्खियां कमल की बहादुरी थी । कमलसिंह के आकस्मिक निधन से अपूरणीय क्षति हुई है । राजपुरोहित का सेना से था लगावः कमल सिंह के पिता खुमानसिंह राजपुरोहित एवं चाचा जोधसिंह राजपुरोहित सेना में सेवा देने के बाद कुछ वर्ष पहले सेवानिवृत हुए थे । इनके पिता सेना में कैप्टन थे । इनके परिवार के सैन्य सेवा से जुड़े होने के कारण कमलसिंह का सेना से खासा लगाव रहा । हर कोई रह गया स्तब्धः पिछले कुछ दिनों से कमलसिंह के कोविड संक्रमित होने के बाद उनके स्वस्थ होने की दुआएं की जा रही थी । हर कोई यह प्रार्थना कर रहा था कि वे जल्दी कोरोना को मात देकर घर लौट आए । लेकिन शुक्रवार को आई दुखदाई खबर से हर कोई स्तब्ध रह गया कमलसिंह हर किसी से मिलनसार होने साथ हर किसी की मदद के लिए तत्पर रहते थे । ऐसे में उनका एकाएक चले जाना , हर किसी को आहत कर गया ।

आसोतरा धाम के ट्रस्टी हेमसिंह राजपुरोहित का निधन, सात बेटियों ने दिया शव यात्रा को कन्धा, दी मुखाग्नि

सीमांत बाड़मेर जिला जहां से शिक्षा के अभाव और रूढ़ीवादिता की कहानियां अब खत्म होने लगी है और बेटियां ऐसे उदाहरण पेश कर रही है जिससे समाज में बेटे-बेटी के भेदभाव की स्थितियां खत्म हो रही है। सीमांत जिला 1000 बेटों पर 992 बेटों के आंकड़े तक पहुंचकर भ्रूणहत्या के अभिशाप को धो रहा है तो समाज में बेटे-बेटी के बराबर होने की मिसाल पेश कर रहा है इसी समय में अब बेटियां अपने पिता के अंतिम संस्कार में अर्थी को कांधा देकर भी यह भावना सामने ला रही है कि बेटे-बेटी में कोई फर्क नहीं। महाबार गांव के पूर्व सरपंच, राजपुराहित समाज के मौजिज व्यक्ति और पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोसिंह शेखावत के राजनीतिक मित्र हेमसिंह राजपुरोहित की अर्थी को रविवार को उनकी सातोंं बेटियों ने कांधा दिया तो समाज में एक नई और प्रेरणादायक सोच सामने आई। राजपुरोहित समाज के अखिल भारत स्तरीय आसोतरा मंदिर ट्रस्ट के आजीवन सदस्य राजपुरोहित जी  समाज के भारत स्तर के समाजसेवियों में माने जाते है। उनका निधन शनिवार को हो गया। हेमसिंह के सात बेटियां है। पिता के निधन के बाद रविवार को गांव में अंतिम संस्कार हुआ तो सातों बेटियां अर्थी को कांधा देने पहुंची और उन्होंने यहां पिता को मुखाग्रि दी। उनकी चिता के सात फेरे लगाकर अंतिम विदाई दी। सातों बेटियों मगूकंवर, छगनकंवर, तीजोंकंवर, पूरीकंवर, सारी कंवर, धापूकंवर, धाईकंवर ने पिता को अंतिम विदाई दी।
यह है यहां रिवाज
रूढीवादी रिवाज के मुताबिक बेटियां यहां श्मशान तक नहीं जाती है। बेटियों और बहूओं को घर में ही रहकर परिजन के निधन पर बैठना होता है। इलाके में यह पहला मौका था कि बेटियों ने अपने पिता की अंतिम यात्रा में घर से बाहर आई और कहा कि वे भी पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होगी। यहां मौजूद लोगों ने इस पर कोई ऐतराज करने की बजाय इसको सराहा और बेटियों को पिता की अंतिम यात्रा में न केवल शामिल किया उनके हाथ से ही अंतिम संस्कार व अन्य रीति रिवाज संपन्न करवाए।
मिसाल बना है पहले भी समाज
राजपुरोहित समाज ने इससे पहले आसोतरा मंदिर में संकल्प लिया कि समाज में नशावृत्ति पर प्रबंध लगाया जाएगा। सामाजिक कार्यक्रम में नशा नहीं लिया जाएगा। समाज की इस प्रेरणा से समाज में नशावृत्ति पर बड़े स्तर पर असर नजर आया है। अधिकांश लोग अब नशावृत्ति से परहेज करने लगे है। इसी तरह समाज में शिक्षा और संस्कार को लेकर भी लगातार प्रयास किए जाने लगे है। सामाजिक परिवर्तनों की पहल में समाज ट्रस्ट के साथ ही समाज के अगुवा लोगों की भूमिका सामने आ रही है

पुलिस कार्रवाई नही करने के साथ उल्टा उन्हें धमकाए जाने पर युवक ने आत्मदाह का कदम उठाया

सिवाना निकटवर्ती लुदराडा गांव में गुरुवार दोपहर को एक युवक ने घर में ही शरीर पर केरोसिन उड़ेलकर खुद को आग के हवाले कर दिया । 
अस्पताल ले जाते समय रास्ते मे ही लुदराडा निवासी मुकेश कुमार पुत्र विशनसिंह ने दम तोड़ दिया ।
 मृतक के चाचा भाखरसिंह ने बताया कि मुकेश कुमार घर पर अकेला रहता था । 
इसकी बहिन 13 जून को बिना बताए सिवाना निवासी प्रेमसिंह के साथ भाग गई थी ।
 रिपोर्ट में बताया कि 1 जुलाई को डीएसपी के सामने बयान में बहन ने अपने भाई मुकेश को पहचानने से इंकार कर दिया था । रिपोर्ट में बताया कि पुलिस की मिलीभगत के चलते बहिन को भगाने वाले प्रेमसिंह पर पुलिस कार्रवाई नही करने के साथ उल्टा उन्हें धमकाए जाने पर उसमे आत्मदाह का कदम उठाया है । लुदराडा से बहन को भगाने वाला प्रेमसिंह पहले से विवाहित था । उसकी 13 जुलाई 2013 इंद्राणा में शादी हो रखी थी , लेकिन उसको घर से निकाल दिया था । माता - पिता का पहले ही उठा हुआ है साया - आत्मदाह करने वाला मुकेश कुमार के माता - पिता का काफी समय पहले निधन हो गया था । अब घर में दोनों भाई - बहिन ही थे , लेकिन 13 जून को इसकी बहिन सिवाना के विवाहित प्रेमसिंह के साथ भाग गई थी ।से इंकार कर दिया था । रिपोर्ट में बताया कि पुलिस की मिलीभगत के चलते बहिन को भगाने वाले प्रेमसिंह पर पुलिस कार्रवाई नही करने के साथ उल्टा उन्हें धमकाए जाने पर उसमे आत्मदाह का कदम उठाया है । लुदराडा से बहन को भगाने वाला प्रेमसिंह पहले से विवाहित था । उसकी 13 जुलाई 2013 इंद्राणा में शादी हो रखी थी , लेकिन उसको घर से निकाल दिया था । माता - पिता का पहले ही उठा हुआ है साया - आत्मदाह करने वाला मुकेश कुमार के माता - पिता का काफी समय पहले निधन हो गया था । अब घर में दोनों भाई - बहिन ही थे , लेकिन 13 जून को इसकी बहिन सिवाना के विवाहित प्रेमसिंह के साथ भाग गई थी ।

पत्रकार जोगसिंह के निधन पर राजपुरोहित छात्रावास में दी गई श्रद्धांजलि

सवांद्दाता   मेघराज सिह राजपुरोहित आसोतरा
 ) - कस्बे राजपुरोहित छात्रावास शनिवार को पत्रकार जोगसिंह राजपुरोहित के निधन पर राजपुरोहित समाज द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित की गई ।श्रदांजलि सभा मे राजपुरोहित समाज के बडी संख्या में युवाओं ने भाग लेकर दो मिनट का मौन एंव पत्रकार जोगसिंह की तश्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई कांग्रेस वरिष्ठ नेता एंव समाजसेवी मुकनसिंह राजपुरोहित ने श्रदांजलि सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि पत्रकार जोगसिंह के निधन से समाज को बहुत क्षति हुई है लेकिन अब हम सभी को सीख लेनी होगी कि कभी भी विपरीत परिस्थितियों में हमे हार नहीं माननी है । श्रदांजलि सभा में एडवोकेट अशोक सिंह अर्थन्डी , अध्यापक भंवरसिंह राजपुरोहित , अशोकसिंह राजपुरोहित , राजपुरोहित छात्रावास अधीक्षक आमसिंह इंद्राणा एडवोकेट गौतमसिंह राजपुरोहित , जितेंद्रसिंह सिवाना ने संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि दबंग पत्रकार के रूप में पहचान थी । जरूरतमंद लोगों मदद में हमेशा अग्रणी रहने वाले पत्रकार के निधन सभी को निराश किया है इस मौके पर डॉ कानसिंह मिठौडा , ग्रामविकास अधिकारी आमसिंह , महेंद्र सिंह सिणेर , चंदनसिंह सिवाना , ठाकुरसिंह सिणेर मुकेश लंगेरा , ओमसिंह , नरपतसिंह इटवाया , सांकलराम सैन , उत्तमसिंह राजपुरोहित सहित बडी संख्या में राजपुरोहित समाज के लोग मौजूद थे ।

दो मिनट का मौन रखकर स्व.जोगराजसिंह राजपुरोहित को दी श्रद्धांजलि

सिवाना भास्कर संवाददाता  प्रिय मित्र स्व.जोगराजसिंह राजपुरोहित आकस्मिक निधन पर गुरुवार को प्रातः 11 बजे डाक बंगला सिवाना में शोक सभा का आयोजन किया गया  । 
गुरुदेव निर्मलदास जी महाराज  ने बताया कि पत्रकार जोगसिंहजी राजपुरोहित के निधन से मीडिया जगत  को बहुत बड़ी के क्षति हुई है ।

 स्थानीय डाक बंगला में  मीडिया एंव प्रशासन द्वारा शोक सभा का आयोजन कर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना कर प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए गए। 
इस मौके पर राजपुरोहित की शोकसभा में श्रीमान विधायक हमीरसिंह जी , महंत श्री निर्मलदासजी , सिवाना उपखण्ड अधिकारी प्रमोद जी सीरवी , तहसीलदार शंकराचार्य जी थानाधिकारी दाऊद खाँ जी , ओमाराम जी , मुकनसिंह जी , पत्रकारों में दिलीपसिंह , अकरम भाई , नरेन्द्र सिंह , कमरुद्दीन , एवं स्थानीय नागरिक मौजूद रहे ।

वहीं गोंरक्षा कमांडो फोर्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष एसएस टाइगर राजपुरोहित ने अपनी टीम के साथ  जोग सिंह राजपुरोहित  के पर्तक गांव पादरू  पर पहुंच कर  श्रदांजली अर्पित की ।
 

कोरोना से बदल गए जिंदगी और मौत के मायने-ना तो तिए की बैठक, उठावना और ना ही मृत्युभोज' अस्थियों के विसर्जन का इंतजार

कोरोना वायरस से फैली वैश्विक महामारी ने जिंदगी तो जिंदगी, मौत के मायने भी बदल दिए हैं। कोरोना से संक्रमित होकर यूं तो अंगुलियों पर गिनने लायक ही मौतें हुई है, लेकिन अधिक उम्र पाकर होने वाले निधन या फिर अलग-अलग बीमारियों, दुर्घटनाओं से काल कलवित होने वालों की अर्थी ना तो चार कंधों पर जा रही है और ना ही राम नाम सत्य स्वर सुनाई देता है। जलती चिता के पास दर्जनों लोग भी अब खड़े दिखाई नही दे रहे हैं। अब तिए की बैठक, उठावने और बाहरवां की रस्में भी विधि विधान से नहीं कर पाना विवशता हो गई है। शोक संदेश भी व्हाट्सएप पर एक लाइन में ,लॉक डाउन के चलते स्वर्गीय आत्मा को मोक्षधाम मिले, प्रार्थना या दुआ ए मगफिरत घरों से ही की जा रही है। शोक संदेश में भी यही आग्रह की स्वर्गीय आत्मा के लिए अपने अपने घरों से श्रद्धांजलि अर्पित करें। यहां तक कि मोबाइल के जरिए अंतिम संस्कार में भी शामिल न होने के लिए आग्रह किया जाता है और इन सब का तात्पर्य है की रस्मे निभाने से ज्यादा जरूरी है जिंदगी।
अस्थियों के विसर्जन का इंतजार
मृतात्माओं की अस्थियों का क्रिया कर्म करने वाले पंडित  आचार्य बताते हैं कि परिजन क्रिया कर्म को लेकर बहुत महत्व देते हैं। फिर भी बहुत समझाने पर ही वे मानते हैं। कई परिवारों में परिपाटी है कि धार्मिक तीर्थ स्थल हरिद्वार ,नासिक, सिद्ध पुर ,जैसे स्थानों पर ही विधि विधान के साथ अस्थियां प्रवाहित कराते हैं। लेकिन लॉक डाउन के चलते इन अस्थियों को पवित्रता के साथ संभाल कर रखा जा रहा है। सभी परिवार अपने म्रतक के देहावसान के पश्चात उनकी अस्थियां संभाल कर रखी हुई है। इस परिवार की परंपरा रही है कि अपने पूर्वजों की अस्थियां गंगा में ही प्रवाहित होती है। ऐसा ही कब्रिस्तान और चर्च में भी अपने नियमों की पालना के अनुसार शव दफनाए जा रहे हैं।
गाड़ी के साथ गिनती के लोग
महामारी के चलते धार्मिक आयोजनों पर रोक होने के साथ साथ अंतिम संस्कार के लिए भी प्रशासन के तय किए गए नियमों के तहत अंतिम संस्कार में १५ लोग तक ही शामिल हो सकते हैं। अंतिम यात्रा के स्थान पर शव को श्मशान तक वाहन से ही ले जाया जाता है ।साथ रहने वाले लोगों को भी मास्क लगाने के साथ-साथ सैनिटाइजर भी साथ ले जाना होता है, वहां मोक्ष धाम में एक दूसरे को डिस्टेंस का भी ख्याल रखना आवश्यक रखा गया है।
रूक सकती है मृत्यु भोज परंपरा
तिये, उठावने की रस्मे अब जब इस दौर में औपचारिक भर ही रह गई है ,वहीं बारहवे के नाम पर होने वाले मृत्युभोज जेसी कुरीती का उन्मूलन होना प्रारंभ हो चुका है। मृत्यु भोज करने से परिजन इसलिए भी कतराने लगे हैं कि कोई एक भी संक्रमित रोगी जाने अनजाने से भी आ गया तो मौजूद सैंकड़ों लोगों के लिए मुश्किल हो जाएगी। सभी को क्वारन्टीन में रहना पड़ेगा या फिर चिकित्सालय में। और इस डर के चलते एक नई पहल का उद्भव हो चुका है ओर मृत्यु भोज परंपरा रुक सकती है

सुषमा स्वराज का निधन : नहीं रहीं पूर्व विदेश मंत्री और BJP नेता सुषमा स्वराज, नाजुक हालत में लाया गया था AIIMS


नई दिल्ली: पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज नहीं रहीं। हालत नाजुक होने पर उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और डॉ. हर्षवर्धन एम्स में मौजूद हैं। अस्पताल के सूत्रों ने बताया कि स्वराज को रात 10 बजकर 20 मिनट पर अस्पताल लाया गया और उन्हें सीधे आपातकालीन वॉर्ड में ले जाया गया। बताया जाता है कि कार्डियक अरेस्ट से उनका निधन हुआ।

पिछले कुछ सालों से उनके स्वास्थ्य में लगातार गिरावट आ रही थी, इसी वजह से उन्होंने 2019 लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया। 2016 में एम्स में ही उनका किडनी प्रतिरोपण हुआ था। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म होने पर मंगलवार शाम को उन्होंने ट्वीट किया था, जिसमें उन्होंने लिखा था, प्रधानमंत्री जी- आपका हार्दिक अभिनन्दन। मैं अपने जीवन में इस दिन को देखने की प्रतीक्षा कर रही थी।

पाली की बहू चंद्रकांता ने यूरोपियन मास्टर्स वॉलीबाल में भारत को दिलाया स्वर्ण

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चंद्रकांता जब दाे साल की थीं ताे मां का निधन हाे गया। दादा अाैर माैसी उन्हें वॉलीबाल की प्रैक्टिस कराने के लिए स्टेडियम तक जाते थे। महज 14 साल की उम्र मंे 1989 में पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभा दिखाने वाली चंद्रकांता ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीतने के लिए 30 साल तक लगातार मेहनत की। इस साल 27 जुलाई से हुए इटली में हुए यूरोपियन मास्टर्स खेलाें मंे जिले की एकमात्र अंतरराष्ट्रीय वॉलीबाल खिलाड़ी चंद्रकांता की कप्तानी में भारतीय महिला मास्टर्स वॉलीबाल टीम ने गोल्ड मेडल जीतकर पाली काे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। फाइनल में ब्रिटेन की टीम काे हराकर यह गोल्ड मेडल जीता। भारत की टीम में चंद्रकांता राजपुरोहित के साथ चरणजीत काैर, शशि, नीलम, नीति, यशाेदा, गीतांजलि, कीर्ति, मीनाक्षी भी थी। अब 44 साल की उम्र में भी युवाअाें जैसा जाेश दिखाकर विश्वभर मंे अलग पहचान बनाई। इससे पहले सितंबर 2018 में भी एशिया पेसिफिक मास्टर्स गेम्स में भारतीय महिला वॉलीबाल टीम ने चंद्रकांता के नेतृत्व में गोल्ड जीता था। यानी एक साल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दाे गोल्ड जीते हैं। उल्लेखनीय है कि चंद्रकांता राजपुरोहित बाली के पूर्व प्रधान व वरिष्ठ कांग्रेस नेता स्व. जेठूसिंह राजपुरोहित के पुत्र अरविंद सिंह की प|ी है। 

ट्रेन में शराबियों ने खिलाड़ियों के साथ की अभद्रता, चंद्रकांता ने अकेले किया सामना : कर्नाटक में टूर्नामेंट में जाने के दाैरान ट्रेन के महिला काेच में 6 से अधिक शराबी पहुंच गए अाैर खिलाड़ियों व महिलाअाें से अभद्रता करने लगे। इस पर चंद्रकांता ने अकेले ही शराबियों का सामना किया। इतना ही नहीं, ट्रेन की चेन खींच कर रुकवाया। पुलिस में सभी की शिकायत करते हुए उन्हें साैंप दिया। इस दाैरान चंद्रकांता काे भी हल्की चाेट अाई, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। इस घटना के बाद अभिभावक भी बेटियाें काे खुशी-खुशी उनके साथ भेजने लगे। 

बाली. यूरोपियन मास्टर्स गेम्स इटली में बारवा गांव की बहू चंद्रकांता राजपुरोहित स्वर्ण जितने के बाद तिरंगा लहराते हुए। 

इतनी ईमानदार कि याेग्य खिलाड़ी का चयन कराया 

चंद्रकांता दिल्ली शिक्षा विभाग में पिछले 10 साल से वॉलीबाल कोच है। खेलाे इंडिया गेम्स दाैरान एक बच्ची का सलेक्शन करने के बाद उसके स्थान पर दूसरी खिलाड़ी काे ले लिया। इस पर चंद्रकांता ने खुद उसकी शिकायत करते हुए उस खिलाड़ी काे वापस टीम में जगह दिलाई। 2018 से वॉलीबाल सेलेक्शन कमेटी की सदस्य हैं। इससे पहले 2014 से दिल्ली विश्वविद्यालय में वॉलीबाल टीम सेलेक्शन कमेटी की सदस्य रह चुकी हैं। दिल्ली राज्य वॉलीबाल टीम में खेलो इंडिया 2018 के लिए मैनेजर नियुक्त हुईं। 

लीग मैच में ब्रिटेन से हारे, फाइनल मंे उसी काे हरा जीता खिताब 

टूर्नामेंट के दाैरान के शुरू के मुकाबले में ब्रिटेन के हाथाें भारत की टीम चंद्रकांता के नेतृत्व में हार गई थी। इस पर शुरू मंे उम्मीदें जरूर टूटी। लेकिन चंद्रकांता अंतरराष्ट्रीय स्तर की काेच भी है। उन्हाेंने टीम का हाैसला बढ़ाया अाैर फाइनल तक पहुंचे। फाइनल में ब्रिटेन की टीम काे हरा खिताब अपने नाम किया। वर्ष 1989 से 2000 के बीच 12 राष्ट्रीय खेलों में राजस्थान का प्रतिनिधित्व किया। फिजिकल एजुकेशन में बैचलर्स की डिग्री प्राप्त की। वॉलीबाल कोचिंग में डिप्लोमा हासिल किया। नेशनल स्पोर्ट्स फेस्टिवल में राजस्थान का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। 1998 में पश्चिम बंगाल में 42, 43, 44, 46 व 47वीं सीनियर नेशनल वॉलीबाल में राजस्थान का प्रतिनिधित्व किया। 


बसेड़ी के पूर्व प्रधान का आकस्मिक निधन

सरमथुरा| शनिवार को बसेड़ी के पूर्व प्रधान और सनाढ्य ब्राह्मण महासभा धौलपुर के जिलाध्यक्ष बृजकिशोर राजपुरोहित का आकस्मिक निधन हो गया। पूर्व प्रधान के निधन से जिला में ब्राह्मण समाज को गहरा आघात हुआ है, वही सरमथुरा के सर्व समाज को गहरा दुख पहुँचा है। पूर्व प्रधान ने सरमथुरा ग्रापं के दो बार सरपंच व एक बार बसेड़ी प्रधान रहते हुए राजनीति में अपना वर्चस्व स्थापित किया था। पूर्व प्रधान ने सरमथुरा को तहसील, अस्पताल को सीएचसी व सरमथुरा को इलेक्ट्रीफाइड कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

BREAKING |news बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदनलाल सैनी का निधन

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जयपुर
लम्बे समय से बीमार चल रहे भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष और राज्यसभा सांसद मदनलाल सैनी का सोमवार शाम दिल्ली में उपचार के दौरान निधन हो गया। वे 75 वर्ष के थे। बताया जा रहा है कि वे कैंसर की बीमारी से जूझ रहे थे।
वे 1990 से 1992 के बीच उदयपुरवाटी से विधायक रह चुके हैं। उन्हें पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी के इस्तीफे के बाद लम्बी अटकलों के बीच जून 2019 में प्रदेशाध्यक्ष बनाया गया था। वे पूर्व विधायक बीजेपी,उदयपुरवाटी, प्रदेश प्रभारी बीजेपी किसान मोर्चा, सदस्य,अनुशासन समिति बीजेपी पूर्व प्रदेश महामंत्री बीजेपी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी काम कर चुके हैं।

बाबू सिंह जी कपूर जी हार्ड अटैक आने से शांत हो गए भगवान उनकी आत्मा को शांति दे और परिवार को दुख सहने की शक्ति दे

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जानकारी के अनुसार बाड़मेर क्षेत्र के अरथणडी  गांव के श्रीमान बाबु सिह सुपुत्र कपुर सिहजी राजपुरोहित 
हार्ट अटेक आने से आज निधन होगया ।
 बाबु सिहजी का हैदराबाद 
के तरुप बाजार  मे ही इलेक्ट्रिकलस केबल  का व्यवसाय था व वहाँ के
व्यापारी वर्ग में उनकी लोकप्रियता के कारण सभी
व्यवसायी भी शोक में डूब गए।उधर  बाबु सिहजी राजपुरोहित
के पैतृक गाँव अरथणडी  में समाचार मिलते ही शोक की
लहर शा गयी ।
 भगवान की मर्जी के आगे किसी का भी जोर नही चलता !!!
भगवान इनकी आत्मा को शान्ती दे!!!

घासेड़ी की अंजली राजपुरोहित ने क्यू की आत्महत्या

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रामसीन थाना अंतर्गत घासेडी गांव में एक युवती ने सोमवार
सवेरे फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या की। पुलिस
अनुसार घासेडी निवासी अंजली पुत्र भंवरलालजी राजपुरोहित ने घर
में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना को लेकर बताया
जा रहा है कि युवती की मानसिक हालत ठीक नहीं थी।
बताया जा रहा है कि अंजली के मानसिक संबंधी दवाईयां भी

चल रही थी।



इकलौती लाड़ो अंजली बिटिया का निधन हो गया भगवान इस बिटिया रानी लाड़ो की पुण्यात्मा को शांति प्रदान करे व गौ लोक में निवास देकर मोक्ष प्रदान करे व इस दुःख की घड़ी में उनके माता पिता सहित पूरे परिवार को दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करावे भगवान ऐसा दुःख किसी दुश्मन को भी न दे। 

निंबाड़ा में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजपुरोहित को दी नम आखों से अंतिम विदाई

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पूर्व जिला परिषद सदस्य और प्रतिपक्ष नेता जिला कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रामगोपालसिंह राजपुरोहित निम्बाड़ा का शुक्रवार की देर रात्रि में निधन हो गया था।
 शनिवार काे उनके पैतृक गांव निम्बाड़ा में गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया। इस मौके पर कांग्रेस नेता महावीरसिंह, सेवादल अध्यक्ष मोहन हटेला, पूर्व सभापति प्रदीप हिंगड़, देसूरी पूर्व ब्लाक अध्यक्ष भैरूसिंह, सिंदरली सरपंच मनोहरसिंह, इंद्रसिंह राजपुरोहित, जोगाराम कुमावत, बलवन्तसिंह, सत्येन्द्रसिंह अादि माैजूद थे। 

गोपाल मंदिर व्यवस्थापक समिति के अध्यक्ष हरिओमसिंह राजपुरोहित का शनिवार को निधन हो गया।

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झाबुआ। गोपाल मंदिर व्यवस्थापक समिति के अध्यक्ष हरिओमसिंह राजपुरोहित का शनिवार को निधन हो गया। कुछ समय से वे बीमार चल रहे थे। पुरोहित शिक्षक पद से सेवानिवृत्त हुए थे। अध्यात्म गतिविधियों में भी निरंतर सक्रिय थे। 20 वर्षों से गोपाल मंदिर का अध्यक्ष पद संभाल रहे थे। उन्होंने पांच अध्यात्मिक पुस्तकें भी लिखीं। राजपुरोहित घराने से थे, इसलिए महल में भी उनकी हर कार्यक्रम में सक्रियता रहती थी। माधौपुरा मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान गणमान्य नागरिक सहित अनेक क्षेत्रों के लोग उपस्थित थे। मुक्तिधाम पर शोकसभा में समाजजन ने श्रद्धांजलि दी।

समाज भवन जोधपुर(न्याति नोहरा सिवांची गेट) के अध्यक्ष समाज रत्न श्रीमान शंकर सिंह जी राजपुरोहित का कल अहमदाबाद में निधन हो गया

समाज भवन जोधपुर(न्याति नोहरा सिवांची गेट) के अध्यक्ष
समाज रत्न श्रीमान शंकर सिंह जी राजपुरोहित का कल
अहमदाबाद में निधन हो गया,आपकी क्षति समाज कभी
पूरी नही कर पायेगा।समाज के साथ-साथ मुझे व्यक्तिगत
क्षति हुयी जिसे पूरा कर पाना असंभव है। राजपुरोहित
समाज आपके अविश्वरनिय समाज हित में सराहनीय कार्यों
को सदैव याद करेगा और हमेशा करता रहेगा।

आप हमेशा हमारी आत्माओं में अजर-अमर रहोगे। दिवंगत
आत्मा को ईश्वर शांति प्रदान करें शत शत नमन चरणों मे
वन्दन।

डॉ.दिलीप सिंह राजपुरोहित(धीरदेसर)
अध्यक्ष,राजपुरोहित सेवा न्यास जोधपुर

शिक्षाविद भोपालसिंहजी राजपुरोहित का निधन

फालना | शिक्षाविद भोपालसिंहजी राजपुरोहित का निधन उनके पैतृक गांव फालना गांव में हो गया है। राजपुरोहित पूर्व में शिक्षक संघ के अध्यक्ष रह चुके हैं। वे प्रधानाचार्य के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। राजपुरोहित की अंतिमयात्रा गुरुवार को सुबह 10:30 बजे उनके फालना गांव से निकाली जाएगी।

भैयांकलां के सरपंच गोपाल सिंह जी राजपुरोहित का निधन

गच्छीपुरा| मकराना ब्लॉक की ग्राम पंचायत भैयांकलां के सरपंच का गुरुवार को निधन हो गया। जानकारी के अनुसार सरपंच गोपालजी सिंह राजपुरोहित तीन माह से अस्वस्थ चल रहे थे, जिसके चलते ग्राम पंचायत में एक दिन का शौक रखा गया। वहीं ब्लॉक सहित ग्रामीणांचल में विभिन्न संगठनों ने राजपुरोहित के निधन को क्षतिपूर्ण बताया। 

सुंधा माता ट्रस्ट व्यवस्था महेंद्रसिंह देवल का दुर्घटना में निधन

सुंधा माता ट्रस्ट व्यवस्था महेंद्रसिंह देवल का दुर्घटना में निधन!
- शादी समारोह से अपने गांव लौट रहे थे, अल सवेरे जसंवतपुरा के सुंधा माता तिराहे पर हुआ हादसा, मौके पर ही हुई मौत, एक अन्य घायल!

जालोर: जसवंतपुरा कस्बे में शुक्रवार एक सड़क हादसे में सुंधा माता ट्रस्ट व्यवस्थापक महेंद्रसिंह देवल का निधन हो गया। वे मालवाड़ा (आर) के मूल निवासी थी और ट्रस्ट में लंबे समय से जुड़े हुए थे और सेवाएं दे रहे थे। जानकारी के अनुसार वे गुरुवार रात को एक शादी समारोह को लेकर क्वालिसी कार से गजापुरा आए थे। शादी समारोह में शिरकत करने के बाद देर रात को वे इसी गाड़ी से मालवाड़ा के लिए रवाना हुए। इस दौरान जसवंतपुरा के सुंधा माता तिराहे पर उनकी गाड़ी अनियंत्रित हो गई और वहां बने प्रवेश द्वार से गाड़ी जा टकराई और उसके बाद वह गाड़ी पलट गई। हादसा इतना भयंकर था कि देवल की मौके पर ही मौत हो गई। चूंकि जसवंतपुरा थाना नजदीक ही है। इसलिए गाड़ी के टकराने की आवाज पर पुलिस दल भी मौके पर हाथों हाथ ही पहुंच गया और गाड़ी में सवार देवल व एक अन्य को अस्पताल ले लाया, जहां पर महेंद्रसिंह देवल को मृत घोषित कर दिया गया। जबकि दूसरे का उपचार चल रहा है। हादसे की सूचना मिलने पर क्षेत्र में शोक की लहर है। सवेरे पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सुपुर्द किया गया।
गांव में शोक की लहर!
हादसे में महेंद्रसिंह देवल के निधन के समाचार पर मालवाड़ा गांव में शोक की लहर है। सवेरे ही परिजन और ग्रामीण जसवंतपुरा पहुंच गए। दिनभर घटनाक्रम को लेकर चर्चाएं जारी रही।

श्री मुकेश नागदा का दुःखद निधन-विभिन्न संगठनों ने दी श्रद्वाजंलि

मनासा। नागदा ब्राह्मण समाज के समाजसेवी, प्रधानाध्यापक श्री मुकेश जी नागदा का दिनांक 29 सितंबर 2018 को मनासा में हृदयाघात होने के कारण दुःखद निधन हो गया है। इनकी अंतिम शवयात्रा निवास स्थान विवेकानंद कॉलोनी मनासा से आज दिनांक 29 सितंबर को प्रात 8ः 30 बजे से निकलकर मनासा मुक्तिधाम पर दाह संस्कार हुआ। शोकाकुल नागदा परिवार पिपलिया रावजी हाल मुकाम मनासा-मध्यप्रदेश।
श्री मुकेश नागदा के निधन पर सर्वश्री पालीवाल वाणी समाचार पत्र, संस्था ब्राह्मण परिवार, पालीवाल गौरव, श्री चारभुजा पैदल यात्री संघ, श्री लक्ष्मीनारायण मंडल, पालीवाल सखी, पालीवाल ब्राह्मण समाज 44 श्रेणी महिला अध्यक्ष श्रीमती पृष्पा पालीवाल, उपाध्यक्ष लता पुरोहित एवं कार्यकारिणी सदस्य, मेनारिया ब्राह्मण समाज 52 श्रेणी इंदौर महिला अध्यक्ष श्रीमती विमला जोशी, उपाध्यक्ष रामी जोशी, सुनील पालीवाल, अनिल बागोरा, राकेश पानेरी, ओम नागदा, राजेश नागदा, राजु नागदा (कानाखेड़ा) सहित अनेक संगठनों ने विन्रम श्रद्वाजंलि अर्पित कर दिवंगत आत्मा को चिर शांति और उनके परिजनों, अनुयायियों और प्रशंसकों को दुःख की इस घड़ी में धैर्य धारण करने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की है।
पालीवाल वाणी ब्यूरो-Anil Bagora.