अपनी जान जोखिम में डाल बचाई थी पैतीस मजदूरों की जिन्दगी , कोरोना को मात नहीं दे सके राजपुरोहित
आसोतरा धाम के ट्रस्टी हेमसिंह राजपुरोहित का निधन, सात बेटियों ने दिया शव यात्रा को कन्धा, दी मुखाग्नि
यह है यहां रिवाज
रूढीवादी रिवाज के मुताबिक बेटियां यहां श्मशान तक नहीं जाती है। बेटियों और बहूओं को घर में ही रहकर परिजन के निधन पर बैठना होता है। इलाके में यह पहला मौका था कि बेटियों ने अपने पिता की अंतिम यात्रा में घर से बाहर आई और कहा कि वे भी पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होगी। यहां मौजूद लोगों ने इस पर कोई ऐतराज करने की बजाय इसको सराहा और बेटियों को पिता की अंतिम यात्रा में न केवल शामिल किया उनके हाथ से ही अंतिम संस्कार व अन्य रीति रिवाज संपन्न करवाए।
मिसाल बना है पहले भी समाज
राजपुरोहित समाज ने इससे पहले आसोतरा मंदिर में संकल्प लिया कि समाज में नशावृत्ति पर प्रबंध लगाया जाएगा। सामाजिक कार्यक्रम में नशा नहीं लिया जाएगा। समाज की इस प्रेरणा से समाज में नशावृत्ति पर बड़े स्तर पर असर नजर आया है। अधिकांश लोग अब नशावृत्ति से परहेज करने लगे है। इसी तरह समाज में शिक्षा और संस्कार को लेकर भी लगातार प्रयास किए जाने लगे है। सामाजिक परिवर्तनों की पहल में समाज ट्रस्ट के साथ ही समाज के अगुवा लोगों की भूमिका सामने आ रही है
पुलिस कार्रवाई नही करने के साथ उल्टा उन्हें धमकाए जाने पर युवक ने आत्मदाह का कदम उठाया
पत्रकार जोगसिंह के निधन पर राजपुरोहित छात्रावास में दी गई श्रद्धांजलि
दो मिनट का मौन रखकर स्व.जोगराजसिंह राजपुरोहित को दी श्रद्धांजलि
कोरोना से बदल गए जिंदगी और मौत के मायने-ना तो तिए की बैठक, उठावना और ना ही मृत्युभोज' अस्थियों के विसर्जन का इंतजार
अस्थियों के विसर्जन का इंतजार
मृतात्माओं की अस्थियों का क्रिया कर्म करने वाले पंडित आचार्य बताते हैं कि परिजन क्रिया कर्म को लेकर बहुत महत्व देते हैं। फिर भी बहुत समझाने पर ही वे मानते हैं। कई परिवारों में परिपाटी है कि धार्मिक तीर्थ स्थल हरिद्वार ,नासिक, सिद्ध पुर ,जैसे स्थानों पर ही विधि विधान के साथ अस्थियां प्रवाहित कराते हैं। लेकिन लॉक डाउन के चलते इन अस्थियों को पवित्रता के साथ संभाल कर रखा जा रहा है। सभी परिवार अपने म्रतक के देहावसान के पश्चात उनकी अस्थियां संभाल कर रखी हुई है। इस परिवार की परंपरा रही है कि अपने पूर्वजों की अस्थियां गंगा में ही प्रवाहित होती है। ऐसा ही कब्रिस्तान और चर्च में भी अपने नियमों की पालना के अनुसार शव दफनाए जा रहे हैं।
गाड़ी के साथ गिनती के लोग
महामारी के चलते धार्मिक आयोजनों पर रोक होने के साथ साथ अंतिम संस्कार के लिए भी प्रशासन के तय किए गए नियमों के तहत अंतिम संस्कार में १५ लोग तक ही शामिल हो सकते हैं। अंतिम यात्रा के स्थान पर शव को श्मशान तक वाहन से ही ले जाया जाता है ।साथ रहने वाले लोगों को भी मास्क लगाने के साथ-साथ सैनिटाइजर भी साथ ले जाना होता है, वहां मोक्ष धाम में एक दूसरे को डिस्टेंस का भी ख्याल रखना आवश्यक रखा गया है।
रूक सकती है मृत्यु भोज परंपरा
तिये, उठावने की रस्मे अब जब इस दौर में औपचारिक भर ही रह गई है ,वहीं बारहवे के नाम पर होने वाले मृत्युभोज जेसी कुरीती का उन्मूलन होना प्रारंभ हो चुका है। मृत्यु भोज करने से परिजन इसलिए भी कतराने लगे हैं कि कोई एक भी संक्रमित रोगी जाने अनजाने से भी आ गया तो मौजूद सैंकड़ों लोगों के लिए मुश्किल हो जाएगी। सभी को क्वारन्टीन में रहना पड़ेगा या फिर चिकित्सालय में। और इस डर के चलते एक नई पहल का उद्भव हो चुका है ओर मृत्यु भोज परंपरा रुक सकती है
सुषमा स्वराज का निधन : नहीं रहीं पूर्व विदेश मंत्री और BJP नेता सुषमा स्वराज, नाजुक हालत में लाया गया था AIIMS
नई दिल्ली: पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज नहीं रहीं। हालत नाजुक होने पर उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और डॉ. हर्षवर्धन एम्स में मौजूद हैं। अस्पताल के सूत्रों ने बताया कि स्वराज को रात 10 बजकर 20 मिनट पर अस्पताल लाया गया और उन्हें सीधे आपातकालीन वॉर्ड में ले जाया गया। बताया जाता है कि कार्डियक अरेस्ट से उनका निधन हुआ।
पिछले कुछ सालों से उनके स्वास्थ्य में लगातार गिरावट आ रही थी, इसी वजह से उन्होंने 2019 लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया। 2016 में एम्स में ही उनका किडनी प्रतिरोपण हुआ था। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म होने पर मंगलवार शाम को उन्होंने ट्वीट किया था, जिसमें उन्होंने लिखा था, प्रधानमंत्री जी- आपका हार्दिक अभिनन्दन। मैं अपने जीवन में इस दिन को देखने की प्रतीक्षा कर रही थी।
पाली की बहू चंद्रकांता ने यूरोपियन मास्टर्स वॉलीबाल में भारत को दिलाया स्वर्ण
चंद्रकांता जब दाे साल की थीं ताे मां का निधन हाे गया। दादा अाैर माैसी उन्हें वॉलीबाल की प्रैक्टिस कराने के लिए स्टेडियम तक जाते थे। महज 14 साल की उम्र मंे 1989 में पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभा दिखाने वाली चंद्रकांता ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीतने के लिए 30 साल तक लगातार मेहनत की। इस साल 27 जुलाई से हुए इटली में हुए यूरोपियन मास्टर्स खेलाें मंे जिले की एकमात्र अंतरराष्ट्रीय वॉलीबाल खिलाड़ी चंद्रकांता की कप्तानी में भारतीय महिला मास्टर्स वॉलीबाल टीम ने गोल्ड मेडल जीतकर पाली काे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। फाइनल में ब्रिटेन की टीम काे हराकर यह गोल्ड मेडल जीता। भारत की टीम में चंद्रकांता राजपुरोहित के साथ चरणजीत काैर, शशि, नीलम, नीति, यशाेदा, गीतांजलि, कीर्ति, मीनाक्षी भी थी। अब 44 साल की उम्र में भी युवाअाें जैसा जाेश दिखाकर विश्वभर मंे अलग पहचान बनाई। इससे पहले सितंबर 2018 में भी एशिया पेसिफिक मास्टर्स गेम्स में भारतीय महिला वॉलीबाल टीम ने चंद्रकांता के नेतृत्व में गोल्ड जीता था। यानी एक साल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दाे गोल्ड जीते हैं। उल्लेखनीय है कि चंद्रकांता राजपुरोहित बाली के पूर्व प्रधान व वरिष्ठ कांग्रेस नेता स्व. जेठूसिंह राजपुरोहित के पुत्र अरविंद सिंह की प|ी है। बसेड़ी के पूर्व प्रधान का आकस्मिक निधन
सरमथुरा| शनिवार को बसेड़ी के पूर्व प्रधान और सनाढ्य ब्राह्मण महासभा धौलपुर के जिलाध्यक्ष बृजकिशोर राजपुरोहित का आकस्मिक निधन हो गया। पूर्व प्रधान के निधन से जिला में ब्राह्मण समाज को गहरा आघात हुआ है, वही सरमथुरा के सर्व समाज को गहरा दुख पहुँचा है। पूर्व प्रधान ने सरमथुरा ग्रापं के दो बार सरपंच व एक बार बसेड़ी प्रधान रहते हुए राजनीति में अपना वर्चस्व स्थापित किया था। पूर्व प्रधान ने सरमथुरा को तहसील, अस्पताल को सीएचसी व सरमथुरा को इलेक्ट्रीफाइड कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
BREAKING |news बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदनलाल सैनी का निधन

बाबू सिंह जी कपूर जी हार्ड अटैक आने से शांत हो गए भगवान उनकी आत्मा को शांति दे और परिवार को दुख सहने की शक्ति दे
जानकारी के अनुसार बाड़मेर क्षेत्र के अरथणडी गांव के श्रीमान बाबु सिह सुपुत्र कपुर सिहजी राजपुरोहित
हार्ट अटेक आने से आज निधन होगया ।
बाबु सिहजी का हैदराबाद
के तरुप बाजार मे ही इलेक्ट्रिकलस केबल का व्यवसाय था व वहाँ के
व्यापारी वर्ग में उनकी लोकप्रियता के कारण सभी
व्यवसायी भी शोक में डूब गए।उधर बाबु सिहजी राजपुरोहित
के पैतृक गाँव अरथणडी में समाचार मिलते ही शोक की
लहर शा गयी ।
भगवान की मर्जी के आगे किसी का भी जोर नही चलता !!!
भगवान इनकी आत्मा को शान्ती दे!!!
घासेड़ी की अंजली राजपुरोहित ने क्यू की आत्महत्या
निंबाड़ा में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजपुरोहित को दी नम आखों से अंतिम विदाई
गोपाल मंदिर व्यवस्थापक समिति के अध्यक्ष हरिओमसिंह राजपुरोहित का शनिवार को निधन हो गया।
झाबुआ। गोपाल मंदिर व्यवस्थापक समिति के अध्यक्ष हरिओमसिंह राजपुरोहित का शनिवार को निधन हो गया। कुछ समय से वे बीमार चल रहे थे। पुरोहित शिक्षक पद से सेवानिवृत्त हुए थे। अध्यात्म गतिविधियों में भी निरंतर सक्रिय थे। 20 वर्षों से गोपाल मंदिर का अध्यक्ष पद संभाल रहे थे। उन्होंने पांच अध्यात्मिक पुस्तकें भी लिखीं। राजपुरोहित घराने से थे, इसलिए महल में भी उनकी हर कार्यक्रम में सक्रियता रहती थी। माधौपुरा मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान गणमान्य नागरिक सहित अनेक क्षेत्रों के लोग उपस्थित थे। मुक्तिधाम पर शोकसभा में समाजजन ने श्रद्धांजलि दी।
समाज भवन जोधपुर(न्याति नोहरा सिवांची गेट) के अध्यक्ष समाज रत्न श्रीमान शंकर सिंह जी राजपुरोहित का कल अहमदाबाद में निधन हो गया
समाज रत्न श्रीमान शंकर सिंह जी राजपुरोहित का कल
अहमदाबाद में निधन हो गया,आपकी क्षति समाज कभी
पूरी नही कर पायेगा।समाज के साथ-साथ मुझे व्यक्तिगत
क्षति हुयी जिसे पूरा कर पाना असंभव है। राजपुरोहित
समाज आपके अविश्वरनिय समाज हित में सराहनीय कार्यों
को सदैव याद करेगा और हमेशा करता रहेगा।
आप हमेशा हमारी आत्माओं में अजर-अमर रहोगे। दिवंगत
आत्मा को ईश्वर शांति प्रदान करें शत शत नमन चरणों मे
वन्दन।
डॉ.दिलीप सिंह राजपुरोहित(धीरदेसर)
अध्यक्ष,राजपुरोहित सेवा न्यास जोधपुर
भैयांकलां के सरपंच गोपाल सिंह जी राजपुरोहित का निधन
सुंधा माता ट्रस्ट व्यवस्था महेंद्रसिंह देवल का दुर्घटना में निधन
- शादी समारोह से अपने गांव लौट रहे थे, अल सवेरे जसंवतपुरा के सुंधा माता तिराहे पर हुआ हादसा, मौके पर ही हुई मौत, एक अन्य घायल!
जालोर: जसवंतपुरा कस्बे में शुक्रवार एक सड़क हादसे में सुंधा माता ट्रस्ट व्यवस्थापक महेंद्रसिंह देवल का निधन हो गया। वे मालवाड़ा (आर) के मूल निवासी थी और ट्रस्ट में लंबे समय से जुड़े हुए थे और सेवाएं दे रहे थे। जानकारी के अनुसार वे गुरुवार रात को एक शादी समारोह को लेकर क्वालिसी कार से गजापुरा आए थे। शादी समारोह में शिरकत करने के बाद देर रात को वे इसी गाड़ी से मालवाड़ा के लिए रवाना हुए। इस दौरान जसवंतपुरा के सुंधा माता तिराहे पर उनकी गाड़ी अनियंत्रित हो गई और वहां बने प्रवेश द्वार से गाड़ी जा टकराई और उसके बाद वह गाड़ी पलट गई। हादसा इतना भयंकर था कि देवल की मौके पर ही मौत हो गई। चूंकि जसवंतपुरा थाना नजदीक ही है। इसलिए गाड़ी के टकराने की आवाज पर पुलिस दल भी मौके पर हाथों हाथ ही पहुंच गया और गाड़ी में सवार देवल व एक अन्य को अस्पताल ले लाया, जहां पर महेंद्रसिंह देवल को मृत घोषित कर दिया गया। जबकि दूसरे का उपचार चल रहा है। हादसे की सूचना मिलने पर क्षेत्र में शोक की लहर है। सवेरे पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सुपुर्द किया गया।
गांव में शोक की लहर!
हादसे में महेंद्रसिंह देवल के निधन के समाचार पर मालवाड़ा गांव में शोक की लहर है। सवेरे ही परिजन और ग्रामीण जसवंतपुरा पहुंच गए। दिनभर घटनाक्रम को लेकर चर्चाएं जारी रही।
श्री मुकेश नागदा का दुःखद निधन-विभिन्न संगठनों ने दी श्रद्वाजंलि
श्री मुकेश नागदा के निधन पर सर्वश्री पालीवाल वाणी समाचार पत्र, संस्था ब्राह्मण परिवार, पालीवाल गौरव, श्री चारभुजा पैदल यात्री संघ, श्री लक्ष्मीनारायण मंडल, पालीवाल सखी, पालीवाल ब्राह्मण समाज 44 श्रेणी महिला अध्यक्ष श्रीमती पृष्पा पालीवाल, उपाध्यक्ष लता पुरोहित एवं कार्यकारिणी सदस्य, मेनारिया ब्राह्मण समाज 52 श्रेणी इंदौर महिला अध्यक्ष श्रीमती विमला जोशी, उपाध्यक्ष रामी जोशी, सुनील पालीवाल, अनिल बागोरा, राकेश पानेरी, ओम नागदा, राजेश नागदा, राजु नागदा (कानाखेड़ा) सहित अनेक संगठनों ने विन्रम श्रद्वाजंलि अर्पित कर दिवंगत आत्मा को चिर शांति और उनके परिजनों, अनुयायियों और प्रशंसकों को दुःख की इस घड़ी में धैर्य धारण करने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की है।
पालीवाल वाणी ब्यूरो-Anil Bagora.











