पाली की बहू चंद्रकांता ने यूरोपियन मास्टर्स वॉलीबाल में भारत को दिलाया स्वर्ण
rajpurohiit news express
चंद्रकांता जब दाे साल की थीं ताे मां का निधन हाे गया। दादा अाैर माैसी उन्हें वॉलीबाल की प्रैक्टिस कराने के लिए स्टेडियम तक जाते थे। महज 14 साल की उम्र मंे 1989 में पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभा दिखाने वाली चंद्रकांता ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीतने के लिए 30 साल तक लगातार मेहनत की। इस साल 27 जुलाई से हुए इटली में हुए यूरोपियन मास्टर्स खेलाें मंे जिले की एकमात्र अंतरराष्ट्रीय वॉलीबाल खिलाड़ी चंद्रकांता की कप्तानी में भारतीय महिला मास्टर्स वॉलीबाल टीम ने गोल्ड मेडल जीतकर पाली काे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। फाइनल में ब्रिटेन की टीम काे हराकर यह गोल्ड मेडल जीता। भारत की टीम में चंद्रकांता राजपुरोहित के साथ चरणजीत काैर, शशि, नीलम, नीति, यशाेदा, गीतांजलि, कीर्ति, मीनाक्षी भी थी। अब 44 साल की उम्र में भी युवाअाें जैसा जाेश दिखाकर विश्वभर मंे अलग पहचान बनाई। इससे पहले सितंबर 2018 में भी एशिया पेसिफिक मास्टर्स गेम्स में भारतीय महिला वॉलीबाल टीम ने चंद्रकांता के नेतृत्व में गोल्ड जीता था। यानी एक साल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दाे गोल्ड जीते हैं। उल्लेखनीय है कि चंद्रकांता राजपुरोहित बाली के पूर्व प्रधान व वरिष्ठ कांग्रेस नेता स्व. जेठूसिंह राजपुरोहित के पुत्र अरविंद सिंह की प|ी है।
चंद्रकांता जब दाे साल की थीं ताे मां का निधन हाे गया। दादा अाैर माैसी उन्हें वॉलीबाल की प्रैक्टिस कराने के लिए स्टेडियम तक जाते थे। महज 14 साल की उम्र मंे 1989 में पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभा दिखाने वाली चंद्रकांता ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीतने के लिए 30 साल तक लगातार मेहनत की। इस साल 27 जुलाई से हुए इटली में हुए यूरोपियन मास्टर्स खेलाें मंे जिले की एकमात्र अंतरराष्ट्रीय वॉलीबाल खिलाड़ी चंद्रकांता की कप्तानी में भारतीय महिला मास्टर्स वॉलीबाल टीम ने गोल्ड मेडल जीतकर पाली काे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। फाइनल में ब्रिटेन की टीम काे हराकर यह गोल्ड मेडल जीता। भारत की टीम में चंद्रकांता राजपुरोहित के साथ चरणजीत काैर, शशि, नीलम, नीति, यशाेदा, गीतांजलि, कीर्ति, मीनाक्षी भी थी। अब 44 साल की उम्र में भी युवाअाें जैसा जाेश दिखाकर विश्वभर मंे अलग पहचान बनाई। इससे पहले सितंबर 2018 में भी एशिया पेसिफिक मास्टर्स गेम्स में भारतीय महिला वॉलीबाल टीम ने चंद्रकांता के नेतृत्व में गोल्ड जीता था। यानी एक साल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दाे गोल्ड जीते हैं। उल्लेखनीय है कि चंद्रकांता राजपुरोहित बाली के पूर्व प्रधान व वरिष्ठ कांग्रेस नेता स्व. जेठूसिंह राजपुरोहित के पुत्र अरविंद सिंह की प|ी है।
ट्रेन में शराबियों ने खिलाड़ियों के साथ की अभद्रता, चंद्रकांता ने अकेले किया सामना : कर्नाटक में टूर्नामेंट में जाने के दाैरान ट्रेन के महिला काेच में 6 से अधिक शराबी पहुंच गए अाैर खिलाड़ियों व महिलाअाें से अभद्रता करने लगे। इस पर चंद्रकांता ने अकेले ही शराबियों का सामना किया। इतना ही नहीं, ट्रेन की चेन खींच कर रुकवाया। पुलिस में सभी की शिकायत करते हुए उन्हें साैंप दिया। इस दाैरान चंद्रकांता काे भी हल्की चाेट अाई, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। इस घटना के बाद अभिभावक भी बेटियाें काे खुशी-खुशी उनके साथ भेजने लगे।
बाली. यूरोपियन मास्टर्स गेम्स इटली में बारवा गांव की बहू चंद्रकांता राजपुरोहित स्वर्ण जितने के बाद तिरंगा लहराते हुए।
इतनी ईमानदार कि याेग्य खिलाड़ी का चयन कराया
चंद्रकांता दिल्ली शिक्षा विभाग में पिछले 10 साल से वॉलीबाल कोच है। खेलाे इंडिया गेम्स दाैरान एक बच्ची का सलेक्शन करने के बाद उसके स्थान पर दूसरी खिलाड़ी काे ले लिया। इस पर चंद्रकांता ने खुद उसकी शिकायत करते हुए उस खिलाड़ी काे वापस टीम में जगह दिलाई। 2018 से वॉलीबाल सेलेक्शन कमेटी की सदस्य हैं। इससे पहले 2014 से दिल्ली विश्वविद्यालय में वॉलीबाल टीम सेलेक्शन कमेटी की सदस्य रह चुकी हैं। दिल्ली राज्य वॉलीबाल टीम में खेलो इंडिया 2018 के लिए मैनेजर नियुक्त हुईं।
लीग मैच में ब्रिटेन से हारे, फाइनल मंे उसी काे हरा जीता खिताब
टूर्नामेंट के दाैरान के शुरू के मुकाबले में ब्रिटेन के हाथाें भारत की टीम चंद्रकांता के नेतृत्व में हार गई थी। इस पर शुरू मंे उम्मीदें जरूर टूटी। लेकिन चंद्रकांता अंतरराष्ट्रीय स्तर की काेच भी है। उन्हाेंने टीम का हाैसला बढ़ाया अाैर फाइनल तक पहुंचे। फाइनल में ब्रिटेन की टीम काे हरा खिताब अपने नाम किया। वर्ष 1989 से 2000 के बीच 12 राष्ट्रीय खेलों में राजस्थान का प्रतिनिधित्व किया। फिजिकल एजुकेशन में बैचलर्स की डिग्री प्राप्त की। वॉलीबाल कोचिंग में डिप्लोमा हासिल किया। नेशनल स्पोर्ट्स फेस्टिवल में राजस्थान का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। 1998 में पश्चिम बंगाल में 42, 43, 44, 46 व 47वीं सीनियर नेशनल वॉलीबाल में राजस्थान का प्रतिनिधित्व किया।
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