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कालका माता के भक्त शिरोमणी भावण्डा गाँव के प्रथम ठाकुर श्रीमान जीवराजसिंग जी अखेराजोत सेवड राजपुरोहित के गौरवशाली इतिहास

कालका माता के भक्त शिरोमणी भावण्डा गाँव के प्रथम ठाकुर श्रीमान जीवराजसिंग जी अखेराजोत सेवड राजपुरोहित के गौरवशाली इतिहास

जय गणेशाय नम: जय नागणेची माता नम:
जय बीसभूजा माता नम : जय खेतेश्वर दाता नम : 
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मित्रो मै आज आपको कालका माता के भक्त शिरोमणी भावण्डा गाँव के प्रथम ठाकुर श्रीमान जीवराजसिंग जी अखेराजोत सेवड राजपुरोहित के गौरवशाली इतिहास से अवगत करा रहा हूँ , जीवराजसिंग जी  के पिता जी विजयराजसिंग जी के पुत्र थे ओर उनके दादा जी महासिंग जी अखेराजोत थे ओर जीवराजसिंग कालका माता के भक्त थे , आप तेजस्वी ओर उच्च चरित्रवान साहसी वीर थे , यह जयपुर मे रहते थे उस समय विक्रम संवत 1844 मे जयपुर पर माधोजी सिंधिया ने हमला कर दिया तो जयपुर वालो ने जोधपुर महाराजा विजयसिंग जी से मदद मांगी तो सेना भेजी थी इसी कारण सिंधिया ने मारवाड् लूटने का मनसूबा बनाया यह खबर जीवराजसिंग जी को मालुम पडी तो तुरंत सिंधिया से मुलाकात करी ओर अपनी सुझ बुझ से उनको मनाया ओर मारवाड् को लूटने से बचा लिया , 
विक्रम संवत 1847 मे एक बार फिर तनातनी सिंधिया ओर जोधपुर के महाराजा विजयसिंग के बीच हुई ओर संधि समझोता करना पडा महाराजा को 52 लाख रूपये सिंधिया को रूपये देना तय हुआ अब सिंधिया ने संधि 52 लाख रूपये कीं गारंटी कीं मांग करने लगा ताकी जोधपुर महाराजा बाद मे पलट नहीं जाये तब महाराजा ने जीवराजसिंग जी को ओल यानी गीरवी रखना , 1847 मे जीवराजसिंग जी सिंधिया के साथ गये थे ओर 1852 मे वापस आये पांच साल वहा रहे ओर खुद रूपये माफ करा कर आये थे , जब जीवराजसिंग जी वहा थे तब पेशवा कीं रानी को 3 दिन से प्रसव पीडा से तड़प रही थी किसी के पास कोई उपाय नहीं था सब बेअसर हो गये तब जीवराजसिंग जी को उपाय पुछा तो जीवराजसिंग ने कालका माता को हाथ जोडकर ज्योत जगाई ओर कहा देवी आप मेरी लाज रखना जीवराजसिंग को आभास हुआ कीं देवी उनके साथ है जीवराजसिंग जी ने पानी के पात्र मे अपनी धोती के पल्लू को पानी मे भीगोकर उसी पानी के पात्र मे निचौड् दिया ओर वो पानी पिलाने को कहा ओर पानी पिते ही प्रसव हो गया ओर सब जीवराजसिंग जी ओर माता के जयकारे लगाने लगे फिर जीवराजसिंग जी को जागीर देने लगे पर जीवराजसिंग जी ने नहीं ली तो कुछ मागंने को कहा तो उन्होने कहा मुझे खुद के लिये कुछ नहीं चाहिये हम खुद के लिए नहीं जीते राज्य के लिए जीते है इसलिए आप 52 रूपये महाराजा के माफ कर दो ओर जोधपुर रियासत के साथ मित्रता रखे आगे से तो सिंधिया ने यह सब मांग पुरी कीं ओर विशेष पत्र लिखकर दिया था सब रूपये माफ किये ओर आगे कभी  परेशान नहीं करेंगे मित्रो जैसे रहेंगे , अब जीवराजसिंग जी 5 साल बाद महाराजा विजयसिंग को वो पत्र दिया तो बहुत खुश हुये ओर जीवराजसिंग को भावण्डा गाँव ओर सोना निवेश ठिकाना सांसन प्रदान किया ओर भावण्डा मे कोट कराने का खर्चा दिया साथ ही कोट के ऊपर ढ़ाई हाथ के कगुरे बनाने सम्मान भी दिया जो किसी को नहीं दिया जाता था, जीवराजसिंग जी ने भावण्डा गाँव मे कोट बनाया ओर दुमंज़िला कालका माता का मन्दिर बनाया ओर आदम कद देवी कीं मूर्ती स्थापित कीं जो आज भी मौजुद है , जीवराजसिंग जी रोज अपनी अंगुली बिन्द कर देवी को अपना रक्त चढाते थे ओर ध्यान लगा कर कई घंटे मगन बैठे रहते देवी के दर्शन होने पर उठाकर फिर कोई काम करते आज भावण्डा कोट मे उनके वंशज रहते है ओर अभी पाटवी ठाकुर प्रेमसिंग जी अखेराजोत सेवड है जो अखिल भारत हिन्दू युवा मोर्चा नामक संघटन चला रहे है ओर पर्यावरण रक्षा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष है  वर्तमान में भावण्डा गाँव के गादीपति ठाकुर के परहित के कार्यो की चर्चा पुरे देश में हो रही है, भावण्डा गाँव मे 3 हिस्सा है ज़िसने कोट मे जीवराजसिंग के वंशज, बंगला मे जीवराजसिंग के छौटे भाई विशनसिंग जी के वंशज ओर फिल्ला भाग मे जीवराजसिंग के काका फतेहसिंग जी के वंशज रहते है भावण्डा वालो के दौ गाँव ओर थे मेडावास ओर धांधलावास वहा कोट भी बनाये थे पर महाराजा ने दोनो गाँव जप्त कर दिये थे किसी कारणवश ओर 2 भागं  वहा नहीं जा पाये इसलिए आज भावण्डा मे ही रह रहे है , आप सभी को जय रघुनाथ जी री ओर धन्यवाद आप सभी का

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