वर्ष 2001 में अपनी जान जोखिम में डालकर निर्माणाधीन मैरिज पैलेस के मलबे से पैतीस मजदूरों की जिन्दगी बचाने वाले कमलसिंह राजपुरोहित कोरोना को मात नहीं दे पाए । उनका पिछले काफी दिनों से गुजरात के अस्पताल में उपचार चल रहा था । उनके असामयिक निधन से हर कोई स्तब्ध है । केन्द्रीय विद्यालय उत्तरलाई में शिक्षक के बतौर कार्यरत कमलसिंह राजपुरोहित साहसिक कार्यों के लिए सदैव तत्पर रहते थे । शैक्षणिक एवं खेलकूद गतिविधियों के साथ सामाजिक कार्यों में उनकी सक्रिय भागीदारी रहती थी । कुछ दिन पहले कोविड -19 से संक्रमित होने पर उनका बाड़मेर एवं गुजरात के में उपचार चला । लेकिन राजपुरोहित कोरोना को मात नहीं दे पाए । राजपुरोहित हर किसी की मदद के लिए तत्पर रहते थे उल्लेखनीय कार्य के लिए उनको जोधपुर जिला प्रशासन के अलावा रेंड एंड व्हाइट वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया वर्ष 2001 में कमलसिंह राजपुरोहित जोधपुर में सरदारपुरा स्थित राजपुरोहित छात्रावास में रहते थे । वह जयनारायण व्यास विश्व विद्यालय के ओल्ड कैम्पस में बीकॉम प्रथम वर्ष में अध्ययनरत थे सरदारपुरा इलाका पॉश इलाके रूप में पहचाना जाता है । राजपुरोहित छात्रावास के सामने स्थित बड़े भूखंड पर मैरिज पैलेस का निर्माण चल रहा था । यह काफी बड़ा चार मंजिला निर्माण कार्य था । ग्राउंड फ्लोर की छत डाली जा चुकी थी । फर्स्ट फ्लोर पर बल्लियां और लोहे के स्ट्रकचर खड़े करके छत भरी जा रही थी । उस समय करीब 125 श्रमिक काम कर रहे थे । तभी एकाएक फर्स्ट फ्लोर की छत ढह गई और छत के दबाव के कारण ग्राउंड फ्लोर की छत भी कुछ समय में टूट गई ।
इससे करीब 20-30 फीट गहरे गडढे सारे मजदूर फंस गए । छात्रावास में कमल राजपुरोहित ने छत गिरने का धमाका सुना तो भागकर बाहर देखा । घटनास्थल की परिस्थिति देखते हए त्वरित निर्णय लेते हुए वे बल्लियों को बांधने की मोटी रस्सी लेकर पास में स्थित नीम के पेड़ से होते हुए निर्माणाधीन बिल्डिंग के छज्जे पर पहुंचे । वहां से मजबूत आधार के जरिए रस्सा बांधकर नीचे लटकाया और तुरंत उसके सहारे नीचे पहुंचे । दुर्घटनास्थल पर पहुंचने में राजपुरोहित सिर्फ 7-8 मिनट लगे । जबकि तब तक आसपास के लोगों एवं काम करने वाले ठेकेदार को भी पता नहीं चल पाया कि यह क्या हो गया है । कमल ने तुरंत ही मलबे में फंसे लोगों को खींचकर बाहर निकालना शुरू किया । बाहर से मदद मिलने से पहले तक वह लगभग पैतीस मजदूरों को ऊपर का मलबा हटाकर सुरक्षित निकाल चुका था । कमल राजपुरोहित की सूझबूझ एवं हिम्मत के साथ अपनी जान जोखिम में डालकर मजदूरों को बचाने के कारण इस हादसे में कोई जन हानि नहीं हुई । कुछ गंभीर घायलों को महात्मा गांधी अस्पताल ले जाया गया । अन्य मजदूरों को प्राथमिक उपचार दिया गया । उनके इस बहादुरी के कार्य के लिए जोधपुर जिला प्रशासन ने गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान सम्मानित राजपुरोहित किया । इसके अलावा राजपुरोहित को रेड एंड व्हाइट वीरता पुरस्कार से भी सम्मानित किया । इनके सहपाठी रह चुके गौरवराजसिंह जुड़िया के मुताबिक कमल शुरूआत से सेवाभावी था । रक्तदान के साथ हरेक जरूरतमद की मदद के लिए तत्पर रहता था । उनके मुताबिक एक बार छात्रावास के आगे से एक बुजुर्ग रोते हुए देखकर कमल ने उसकी वजह पूछी तो उन्होंने बताया कि उनकी पुत्र वधु उम्मेद अस्पताल में भर्ती है । उसकी जान बचाने के लिए रक्त की जरूरत है , लेकिन मिल नहीं पा रहा है । इस पर कमल तत्काल मोटरसाइकिल लेकर अस्पताल पहुंचा और रक्तदान कर महिला की जान बचाई । गौरवराजसिंह जुड़िया के मुताबिक अपनी जान जोखिम में डालकर मजदूरों की जान बचाने के साहसिक कारनामे के बाद दूसरे दिन के अधिकतर समाचार पत्रों की सुर्खियां कमल की बहादुरी थी । कमलसिंह के आकस्मिक निधन से अपूरणीय क्षति हुई है । राजपुरोहित का सेना से था लगावः कमल सिंह के पिता खुमानसिंह राजपुरोहित एवं चाचा जोधसिंह राजपुरोहित सेना में सेवा देने के बाद कुछ वर्ष पहले सेवानिवृत हुए थे । इनके पिता सेना में कैप्टन थे । इनके परिवार के सैन्य सेवा से जुड़े होने के कारण कमलसिंह का सेना से खासा लगाव रहा । हर कोई रह गया स्तब्धः पिछले कुछ दिनों से कमलसिंह के कोविड संक्रमित होने के बाद उनके स्वस्थ होने की दुआएं की जा रही थी । हर कोई यह प्रार्थना कर रहा था कि वे जल्दी कोरोना को मात देकर घर लौट आए । लेकिन शुक्रवार को आई दुखदाई खबर से हर कोई स्तब्ध रह गया कमलसिंह हर किसी से मिलनसार होने साथ हर किसी की मदद के लिए तत्पर रहते थे । ऐसे में उनका एकाएक चले जाना , हर किसी को आहत कर गया ।