अनलॉक 1.0 लगते ही धीरे धीरे पूरे बाजार खुल रहे है और सरकार भी सख्ताई अब कम करने से आमजन की जिंदगी रफ्तार पकड़ रही है । अब सवाल यह है कि जब सरकार ने सोमवार से , क्लब , होटल , माल , रेस्टोरेंट आदि खोलने के आदेश दे दिए तो लेकिन अभी तक मंदिरों के पट बंद क्यों .. जबकि मंदिर ट्रस्ट सरकार द्वारा कोरोना को लेकर जारी गाइडलाइंस को अच्छी तरह से पालना करवाने सक्षम है । सिवाना एंव बालोतरा क्षेत्र की जनता आस्तिक है इन्हें ईश्वर के प्रति गहरी आस्था एवं श्रद्धा है जिससे मंदिर ट्रस्ट द्वारा बताई गई गाइडलाइंस को भक्त हरगिज नहीं तोड़ सकते , जबकि होटलों , रेस्टोरेंट , मॉल , क्लब में सोशल डिस्टेन्स इत्यादि की पालना सही से नहीं हो सकती । जबकि इनको खोल दिया एवं मंदिरों को जिला स्तर पर बनी कमेटी खोलने पर ही निर्णय कर सकती है । ऐसे कमेटी को आस्था के केंद्रों को खोलने की अनुमति दी जानी चाहिए । महामंडलेश्वर निर्मलदासजी महाराज ने रविवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र भेजकर मंदिर खोलने का सुझाव दिया । बताया कि सिवाना एवं बालोतरा क्षेत्र में ब्रह्मधाम आसोतरा , राणी भटियाणी मंदिर जसोल , नाकोड़ा भैरव मंदिर , रणछोड़ाय खेड़ मंदिर , निर्मल कुटीर , हिंगलाज मंदिर , हल्देश्वर महादेव , नागणेशी मंदिर सहित कई ऐसे छोटे - मोटे मंदिर जो लॉकडाउन 1.0 से ही बंद है जिसके चलते छोटे मंदिरों के पुजारियों की रोजी रोटी पर भी संकट आ गया है । धर्मगुरुओं एवं भक्त भाविकों का सरकार को सुझाव है कि हमारे आस्था के केंद्र भी खुलने चाहिए जिससे लोगों में कोरोना को लेकर जो अस्थिरता बनी है , उसको पूजा अर्चना , ध्यान एंव योग के बल से किया जा सकता है । जूना अखाड़ा के अंतराष्ट्रीय साधु एंव दूदेश्वर मठ के महंत नारायणगिरी महाराज ने भी सरकार से मंदिरों के पाट खोलने की अनुमति देने की अपील की है । सरकार को सुझाव है कि मंदिर लोगों के धार्मिक आस्था का केंद्र । जहां पर पवित्रता का पाठ होता । मंदिरों को खोले तो यहां पर सरकार की गाइडलाइन का अच्छे से पालन हो सकता है , जबकि होटल , रेस्टोरेंट , मॉल , रेस्तरां सोशल डिस्टेंस की पालना मुश्किल है । -
निर्मलदासजी महाराज , राष्ट्रीय सचिव भारत साधु समाज