ऑक्सीजन लेवल 77 जाने पर उखड़ने लगी थी सांसें, पति वार्ड में साथ रहकर सेवा करते रहे; अब वापस घर लौटीं

पति   का सकारात्मक रवैया और अस्पताल में नर्सिंगकर्मियों की देखभाल के चलते आखिरकार सीताबेन 9 दिन के भीतर कोविड को हरा जीवन की जंग जीत मंगलवार को बांगड़ अस्पताल से डिस्चार्ज हो गईं। अस्पताल में भर्ती होने के दौरान उनका ऑक्सीजन लेवल 77 था। मंगलवार को जब उन्हें छु्ट्टी दी गई, तब ऑक्सीजन लेवल 97 था। उन्होंने कहा कि नर्सिंगकर्मियों के सकारात्मक रवैये से जल्दी ठीक होने में मदद मिली। दरअसल, पाली जिले के धनला गांव निवासी चुन्नीलाल राजपुरोहित की पत्नी सीताबेन को सांस लेने में दिक्कत होने लगी। स्थिति बिगड़ते देख परिजन 2 मई को सीताबेन को उपचार के लिए बांगड़ अस्पताल लेकर पहुंचे। उस समय सीताबेन का ऑक्सीजन लेवल महज 77 था। सीता की उखड़ती सांसों को लेकर परिवार के लोग भी काफी चिंतित थे। आखिरकार काफी मशक्कत के बाद सीता की स्थिति को देखते हुए उन्हें बेड नसीब हुआ।

सीता ने कहां पति के कारण जिंदा हूं
सीताबेन ने कहा कि जब उन्हें अस्पताल लाया गया, उस समय हालत काफी खराब थी। उन्हें बचने की उम्मीद न के बराबर थी। मन में एक ही दर्द था कि मेरे बच्चों का क्या होगा। वहीं, पति चुन्नीलाल राजपुरोहित ने हर कदम पर पत्नी का हौंसला बढ़ाया। दिन हो या रात हर समय उनके साथ वार्ड में सेवा करते रहे। हर समय कहां तुम्हें कुछ बीमारी नहीं हैं। थोड़ी सांस लेने में दिक्कत हो रही है। वह कुछ दिन में ठीक हो जांएगी। जल्दी तैयार हो जाओ घर पर बेटियां तुम्हारा इंतजार कर रही हैं।

गुजरात से आए थे गांव
चुन्नीलाल काम-काज के सिलसिल में गुजरात में परिवार सहित रहते हैं। अप्रैल में पारिवारिक कार्य के चलते परिवार सहित गांव धनला आए थे। इस दौरान सीताबेन बीमार पड़ गई। उन्होंने बताया कि वे गुजरात में नाश्ते की दुकान चलाते हैं।

सुरेश राजपुरोहित ईटवाया

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