4 साल हो गये.......
लेकिन अफसोस आज दिन तक मनोहर के परिवार को न्याय नहीं मिला,,,मनोहर नहीं मिला.....
सरकारें बदल गई,, तथाकथित CID जाँच की धूल भी नहीं हटी.......
न्याय की किरण ना जाने कहाँ खो गई.......
कभी कभी मन में प्रश्न उठते है.....आखिर आम आदमी के साथ ही ऐसा क्यों?
नेताओं और प्रतिष्ठित लोगों के कुत्ते बिल्ली भी 4 दिन में प्रशासन ढूंढ लेता है.....लेकिन आम आदमी के बच्चे का अपहरण हुये 4 साल बीत जानें के बाद भी इनके कानों पर जूं भी नहीं रेंगती.......
एक माँ और तीन बहनों का एकलौता बेटा ना जाने कहाँ ओझल हो गया.......
इतना बड़ा,सक्षम और समर्द्ध समाज क्या इस परिवार को न्याय नहीं दिला सकता...?
इतना मजबूत राजनैतिक नेतृत्व क्या खाली जयकारों तक ही सीमित है....?
इससे पहले की बहुत सी कोशिशें नाकाम हुई है,,लेकिन शायद अंदर का जज्बा हार मानने को तैयार नहीं है......
असफ़लता अकसर कानों में दुगना शोर करती है.....
और धिक्कारती है कि हम इतनी जल्दी हार नहीं मान सकते,,इतना बड़ा समाज इतनी जल्दी घुटने नहीं टेक सकता.....
याद रखियेगा आज मनोहर है कल शायद हमारा बेटा या हमारा परिजन होगा.......
सत्ता से न्याय माँगना हम सभी का अधिकार है..........
सत्ता के गलिहारो में आम आदमी की कौन सुनेगा?
समाज खाली जयघोष के लिये ही नहीं है ,,समाज सभी के सुख दुःख का समान रूपी साथी है......
राजस्थान की सरकार से निवेदन है न्याय में देरी ना करें,,,, क्योंकि देरी से मिला न्याय भी अन्याय ही है......
मनोहर अपहरण केस का खुलासा जल्दी करें,,,उच्चस्तरीय जाँच या फिर CBI जाँच करके इस मामले को सुलझाये और आम आदमी को न्याय दे,,,समाज को उसका लाल वापस दे ...
🙏