पत्रकारिता पर संकट"

"पत्रकारिता पर संकट"

"पाली जिले के SP और जोधपुर रेंज के IG नहीं दे पाएंगे इन सवालों के जवाब..."

"दोषी पुलिसकर्मी के दण्डित होने तक पत्रकार नहीं रुकें और जनता को अपनी कलम से जगाएँ...

राजस्थान के पाली जिले के ईमानदार और संवेदनशील पत्रकार श्री वीरेन्द्र राजपुरोहित (9024985089) को, झूठे मुक़दमे में फँसाने का प्रमुख कारण, एक श्रमिक नेता श्री रामनाथ सिंह की हत्या पर खबर करना है...इस हत्या का आरोप पुलिसकर्मियों पर ही है और न्यायालय के आदेश से "न्यायिक जाँच" भी शुरू हो चुकी है...

याद रखिएगा आज इस पत्रकार को फँसाया गया है और कल किसी अन्य पत्रकार का नम्बर आएगा...

सवाल यह पूछे जाएं :

1. कानून के जानकारों का मानना है कि, पत्रकार वीरेन्द्र राजपुरोहित द्वारा भेजे गए व्टाट्सएप्प संदेश पर कोई संज्ञेय अपराध कारित नहीं हुआ तो कोतवाली थानाधिकारी ने पत्रकार के खिलाफ किस मंशा से आपराधिक मुकदमा दर्ज किया है ?

2. देशभर से कई जागरूक नागरिकों द्वारा एसपी पाली के ध्यान में यह मामला लाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं करने से उनकी मिलीभगती साबित हो रही है, ऐसे में क्या उन जागरूक नागरिकों के खिलाफ भी मुकदमे दर्ज किए जाएंगे ? 

3. पुलिस और श्रमिकों के बीच हुई झड़प के दौरान श्रमिक नेता रामनाथ सिंह वहां मौजूद नहीं थे (सीसीटीवी फुटेज मौजूद है), फिर बिना किसी साक्ष्य और सबूत के पुलिस ने किसके इशारे पर उनको घर से उठाकर गिरफ्तार किया ?

4. पुलिस थाने के अंदर गार्डन में श्रमिक नेता के साथ बैसबॉल के बल्ले से पिटाई की तस्वीरें मीडिया में छपी है, पुलिस थाने में कायदे-कानून और मानवाधिकारों के ऐसे उल्लंघन पर पत्रकार वीरेन्द्र राजपुरोहित द्वारा एसपी को सूचित किए जाने के बावजूद एसएचओ के खिलाफ कार्रवाई नहीं किए जाने की क्या वजह है ?

5. न्यायिक अभिरक्षा में संदिग्ध मृत्यु के शिकार रामनाथ सिंह की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गंभीर चोटों की बात सामने आ रही है, जिससे पुलिस अभिरक्षा में उनके साथ मारपीट की संभावनाओं की पुष्टि होती प्रतीत हो रही है ? पुलिस के इस अमानवीय और बर्बर रवैये पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है ?

6. मृतक श्रमिक नेता के पुत्र ने पाली पुलिस अधीक्षक को जिले के तीन थानाधिकारियों, मील प्रशासन सहित सात लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने की इत्तिला दी थी, हत्या जैसे गंभीर मामले में तीन दिन बाद भी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है... जबकि उस पर खबर करने वाले पत्रकार पर तत्काल मुकदमा दर्ज हो रहा है। पुलिस का यह दोहरा रवैया न्याय और नीति के खिलाफ नहीं है ?

सुरेश राजपुरोहित ईटवाया

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